ज़िन्दगी की वन - वे सड़क पे यू -टर्न ढूंढता मुसाफ़िर,
जीना चाहता है एक बार...फिर उन खुशनुमा पलों को,
बदलना चाहता है अपनी करी हुई कुछ नादानियों को,
शुरू करना चाहता है एक बार फिर,
सिफ़र से ज़िन्दगी की दौड़...
क्या पता इस बार कामयाबी से मुलाक़ात हो जाए!!
(5-Sep-11)
(5-Sep-11)
Nice to see ur poetry on the blogs... where is sifar hua h safar ye shuru??? Publish that one also... that is one of ur bests... :)
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